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________________________________________    __________ मुजफ्फरनगर जनपद के 100 किमी के दायरे में  गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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घाट क्षेत्र सहारनपुर जनपद का अति पिछड़ा स्थान है।

 

घाड़ का मतलब है एक ऐसा सूखा स्थान जहां पानी की बहुत ही कमी हो। यह घाड़ क्षेत्र गंगा- यमुना नदियों के बीच शिवालिक की पहाड़ियों के साथ साथ एक पट्टी की शक्ल में 80 किलोमीटर तक फैला हुआ है। उबड़- खाबड़ इस क्षेत्र की चौड़ाई लगभग 16 किलोमीटर है।

खेती-बाड़ी करना यहां बहुत ही मुश्किल है। क्योंकि खेतों को सिंचनें के लिए इस इलाके में पानी ही नहीं है। इस इलाके में नलकूप लगाना भी संभव नहीं है। क्योंकि एक तो जमीन में पानी बहुत गहराई पर है और पथरीली जमीन होने के कारण जमीन में गहराई तक पत्थर होने से इस इलाके में नलकूप के लिए जमीन में बोरिंग करना बहुत मुश्किल है।

शिवालिक की पहाड़ियों से अनगिनत बरसाती नदियां और नाले निकलते हैं। यहां बहने वाली बरसाती नदियों से हर साल पहाड़ों से कटकर रेत और पत्थर आते हैं, जो खेती की जमीन पर बैठकर उसे किसी काम का नहीं रहने देते। बरसात के समय जब यह नदियां विकराल रूप धारण करती हैं तब अपने साथ खेतों को बुरी तरह से काटकर अपने साथ बहा कर ले जाती हैं।

सहारनपुर जनपद का घाड़ क्षेत्र विकास में भले ही पीछे हो परंतु धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

यहां पर सिद्ध पीठ माता शाकुंभरी देवी का मंदिर लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है। शिवालिक पर्वत की तलहटी में स्थित सिद्ध पीठ माता शाकुंभरी देवी घाड़ क्षेत्र की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

घाड़ क्षेत्र में ताजेवाला हैड वर्क, बादशाही बाग  आदि भी महत्वपूर्ण स्थान है।

घाड़ क्षेत्र के मुजफ्फराबाद क्षेत्र के खुजनावर गांव का भी ऐतिहासिक महत्व समझा जाता है। यहां पर स्थित खेड़े से खुदाई के दौरान पाषाण युग के अनेक महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं।

इसी क्षेत्र के साठौली कदीम के गांव फैजाबाद में स्थित मुगल बादशाह अकबर द्वारा बनवाया गया महल ।

फल पट्टी क्षेत्र बेहट के आमों की मिठास देश ही नहीं वरन विदेशों में भी चखी जाती है। यहां पर बेहद उच्च कोटि के आमों की नस्ल पाई जाती हैं ,जो कि देश में ही नहीं विदेशों में भी मशहूर हैं।

बेहट के लोहे की घंटियों एवं लोहे के फर्नीचर की देश विदेशों में बड़ी मांग है।

घाड़ क्षेत्र में स्टोन क्रेशर ,चूने के भट्टे और खनन हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।

इस क्षेत्र में रेशम उत्पादन के लिए कीट पालन और पत्ती प्राप्त करने हेतु बड़े-बड़े फार्मो की स्थापना हुई।

 

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