__________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के१०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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पुराने समय में चंदौसी नगरी को चांदसी नगरी के नाम से जाना जाता था।

 

चंदौसी का गणेश महोत्सव

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चंदौसी नगर में गणेश महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। प्रतिवर्ष महाराष्ट्र की ही तरह चंदौसी नगर में 10 दिवसीय गणेश महोत्सव मनाया जाता है I चंदौसी नगर के गणेश मंदिर में प्रातः काल से ही श्रद्धालु आने शुरू हो जाते हैं। घरों में भी गणपति की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू की जाती है।  नगर के अनेक स्थानों पर पंडालों में गणपति स्थापित किए जाते हैं।

इस अवसर पर गणेश मंदिर में प्रातः काल से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो जाती है I श्रद्धालु गणेश जी की प्रतिमा के साथ गणेश मंदिर पहुंचते हैं और विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना करते हैं। उसके बाद सभी श्रद्धालुओं के द्वारा प्रतिमाओं को अपने- अपने घर ले जाकर स्थापित किया जाता है। गणेश मंदिर में यह सिलसिला सुबह से ही शुरू हो जाता है। इस दिन मंदिर में भारी भीड़ लग जाती है। हर ओर गणपति भगवान के जयकारे गूंजते रहते हैं।

पिछले वर्षों में अनुमान है कि सात हजार घरों में गणपति की स्थापना की गई वहीं नगर के विभिन्न स्थानों पर लगभग 30 गणपति पंडाल सजाए गए।   10 दिनों तक चंदौसी नगर गणपति की भक्ति में लीन रहता है। गणेश चौथ के दिन शाम के समय गणेश मंदिर से भगवान गणपति की भव्य तथा विराट शोभा यात्रा निकाली जाती है।

 

गणेश चौथ मेला

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चंदौसी का  गणेश चौथ मेला, उत्तर भारत का प्रसिद्ध मेला है। गणेश मंदिर और गणेश चौथ मेले का अपना एक अलग इतिहास है।

बताते हैं कि एक दिन कहीं से एक हाथी का बच्चा इस स्थान पर आकर बैठ गया था। लोगों के द्वारा अनेक प्रयास करने से भी वह टस से मस नहीं हुआ, तब किसी ने कहा की यहां गणेश जी का मंदिर बना दिया जाए। पंडित जी को बुला कर मंदिर बनाने का संकल्प लिया गया। आश्चर्य कि वह हाथी का बच्चा अपने आप ही गायब हो गया। शुरुआत में यहां गणेश जी का एक  छोटा मंदिर बनाया गया। फिर विचार आया की गणेश चौथ पर एक मेले की शुरुआत की जाए।बताया जाता है इस मेले की शुरुआत सन 1962 में एक बहुत छोटे रूप में की गई थी।  इतने वर्षों बाद अब यह मेला उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध मेला माना जाता है।

गणेश चौथ मेले की शुरुआत में गणेश मंदिर से गणेश मेला परिसर तक भगवान गणेश की गणेश डोल यात्रा निकाली जाती है और विधि विधान से मेला परिसर में श्री गणेश भगवान की प्रतिमा को विराजमान किया जाता है। मेला परिसर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

गणेश चौथ मेले में मनोरंजन के लिए कई प्रकार के छोटे- बड़े झूले, खेल- तमाशे व सर्कस आदि आकर्षण के साथ-साथ खाने- पीने के सामानों की दुकानें भी होती हैं। कई प्रांतों से व्यापारी यहां आकर अनेक प्रकार के सामानों की दुकाने लगाते हैं और मेले की शोभा बढ़ाते हैं।

गणेश चौथ शोभा यात्रा

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चंदौसी की गणेश चौथ शोभा यात्रा पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। गणेश चौथ के दिन पूरा चंदौसी नगर गणपति बप्पा मोरिया से गुंजायमान हो उठता है। शाम को शोभायात्रा निकाली जाती है।

विभिन्न देवी – देवताओं की विशाल तथा स्वचालित झांकियां गणेश शोभायात्रा का विशेष व मुुख्य आकर्षण होती हैं। एक-एक झांकी को बनाने में कारीगरों को कई – कई हफ्ते या कई महीने तक लग जाते हैं। इस महोत्सव को देखने के लिए लाखों की संख्या में आस – पास के स्थान और देश- विदेश से लोग यहां आते हैं। इस दिन चंदौसी आने वाली सारी ट्रेनें फुल भरकर यहां आती है। सड़कों पर पैर रखने की भी जगह नहीं रहती।

इतनी बड़ी और स्वचालित झांकियां भारत भर में सबसे पहले चंदौसी में ही बनी। जिन्हें चंदौसी के कारीगर ही तैयार करते हैं। इन झांकियों में किसी – किसी झांकी को बनाने  में दस – दस महीने तक लग जाते हैं।

इन झांकियों को स्थानीय कलाकार ही तैयार करते हैं कोई भी बाहर का कलाकार बुलाया नहीं जाता है। इन कलाकारों में भी कोई व्यापारी होता है, कोई डॉक्टर – वकील होता है या कोई अन्य कार्य कर रहा होता है। दिन में यह अपना काम करते हैं, रात को बारह या एक बजे तक भी झांकियों को तैयार करने की सेवा करते हैं। 20 – 22 फुट तक ऊंची झांकियां यहां तैयार की जाती है। झांकियों में हर साल गणेश जी को अलग अलग रूप दिए जाते हैं। कई – कई दशक हो गए हैं कलाकारों को यह झांकियां बनाते हुए। झांकी तैयार करने के लिए कोई कलाकार कोई पैसा नहीं लेता सब तन- मन – धन  निस्वार्थ भाव और मेहनत – लगन से यहां सेवा कार्य करते हैं।  पूरे साल चलता रहता है झांकियां बनाने का काम, मोटर के द्वारा संचालित होती हैं झांकियां। हर साल नए-नए विचार और नए अवतार में नई झांकियां बनाई जाती हैं।

इस प्रकार की स्वचालित झांकियां भारत में सबसे पहले चंदौसी में ही बनाई गई।

चंदौसी में ही एक पैर पर खड़े गणेश जी की 140 फुट ऊंची मूर्ति का निर्माण कार्य चल रहा है। लोकल कलाकार ही इस मूर्ति को बना रहे हैं। कोई कलाकार बाहर से नहीं  आता  कोई पैसा नहीं लेता सब निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं।

गणेश जी की इस मूर्ति का निर्माण पूरा होने के बाद चंदौसी नगर में लोगों के लिए यह आकर्षण का स्थान होगा।

चंदौसी नगरी को अगर गणेश नगरी कहा जाए तो गलत नहीं है

 

 

 

 

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