_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में धौलाना का ऐतिहासिक महत्व है।

हापुड़ जनपद में पिलखुवा कस्बे से 8 किलोमीटर दूर धौलाना कस्बा स्थित है।

सन 1857की क्रांति के समय यहां के रणबांकुरे ने धौलाना के थाने पर हमला करके थाने को फूंक डाला था। इस घटना के बाद अंग्रेज बौखला गए थे। अंग्रेज कंपनी सेना ने पूरे धौलाना कस्बे पर कहर ढा दिया। यह 29 नवंबर 1857 का दिन था। अंग्रेजों ने धौलाना के अनेक घरों में आग लगा दी। खासतौर से विद्रोही राजपूतों के घरों को चुन-चुन कर फूंक दिया गया। वह इसलिए क्योंकि राजपूतों ने यहां की क्रांति में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। अंग्रेज सेना ने उस दिन कस्बे के 14 लोगों को विद्रोह का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। अंग्रेजों ने अपनी दरिंदगी को दिखाते हुए और धौलाना कस्बे में आतंक फैलाने के उद्देश्य से यहां से 14 कुत्तों को भी पकड़ा। इसके बाद अंग्रेज सेना ने पहले धौलाना की क्रांति के 14 देशभक्तों को खुलेआम धौलाना के एक पीपल के पेड़ पर लटका कर फांसी दी। उसके बाद पकड़ कर लाए गए सभी कुत्तों को गोली मार कर उन शहीदों के शवों के साथ कुत्तों की लाशें रखकर वहां ऐलान करवाया गया था कि जो भी अंग्रेज कंपनी सरकार की खिलाफत करेगा ऐसे ही कुत्ते की मौत मरेगा। लेकिन इसके बाद भी धौलाना के लोगों ने आजादी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखी थी।

धौलाना कस्बे में उन 14 शहीदों की शहादत का मूक गवाह ‌ वह पीपल का पेड़ मौजूद है।
धौलाना के शहीदों की शहादत के 100 साल बाद सन 1957 में धौलाना के उस स्थान पर एक स्मारक की स्थापना की गई थी।

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