_______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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मेरठ के निकट ही शाहजहांपुर गांव बसा हुआ है। यह एक ऐसा गांव है जिसकी कुल कृषि भूमि के लगभग 99 प्रतिशत भूमि में बाग लगे हैं, जिसमें 96 प्रतिशत भूमि पर तो आम के ही बाग हैं।

मेरठ-गढ़मुक्तेश्वर मार्ग पर मेरठ से लगभग 30 किलोमीटर दूर मार्ग के दोनों ओर शाहजहांपुर गांव बसा है। फल पट्टी क्षेत्र के एक विशेष गांव के रूप में जाना जाने वाले शाहजहांपुर गांव में प्रवेश करने से कई किलोमीटर पहले ही तेज गर्मी में भी ठंडी-ठंडी हवाओं के झोंकों से ठंडक का अहसास होने लगता है। ठंडी हवाओं के झोंकों से मानों ऐसा लगता है कि जैसे अब किसी ठंडे पर्वतीय स्थल की शुरुआत हो गई है। इस अनुभव को दूरदराज से आने वाले लोग भी बयान करते हैं।

इस गांव को मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल के आखिरी दौर में बादशाह शाहजहां की फौज के मनसबदार देवान अब्बास ने बसाया था। उस समय यहां आम के कुछ पेड़ भी लगा दिए गए थे। लेकिन आज शाहजहांपुर के आम पूरे देश में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में शाहजहांपुर अकेला ऐसा गांव है जहां की लगभग पूरी कृषि भूमि फलदार वृक्षों से आच्छादित है। आम के बागों से बची हुई बाकी भूमि पर आडू, नाशपाती, लीची, केला, अमरूद आदि के बाग लगे हैं।

शाहजहांपुर गांव में विशेष प्रकार के आम होने के कारण इस गांव की ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। इस गांव में प्रकृति के अनमोल खजाने को सजों कर रखा गया है। शांति और सुकून चाहने वाले विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में यहां खींचे चले आते हैं। विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र यहां स्थित एक फार्म हाउस में बनी नर्सरी भी है।

फार्म हाउस की नर्सरी के ग्रीन हाउस में दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधों को बहुत ही बेहतरीन तरीके से संजो कर रखा गया है। यहां संजोकर रखे गए कुछ पौधे तो ऐसे हैं जो अब भारत में कहीं और नहीं पाए जाते।

विशालकाय पौधों को यहां की नर्सरी में बोनसाई के रूप में छोटे गमलों में रखा गया है, जो अपने आप में अद्भुत है। कुछ विशेष किस्म के बोनसाई पौधों की कीमत तो कई-कई लाख रुपए है। विशालकाय बरगद, इन्फैकटोरिया,एगेस्था, बोटल पाम, काली पत्ती का चीकू, फाईकस बेंजामिना, कचनार, ट्रैवलर पाम,ऐरेथीना ब्लैक आई, चाइना ऑरेंज, कमरख, संबल सिल्क काटेंटरी, फाईकस बैंजामिना वेरीगेटिड आदि अनेक दुर्लभ प्रजाति के पौधे हैं जिनकी विदेशों में बहुत मांग है। इन दुर्लभ पौधों से अपने घर और ऑफिस की शोभा बढ़ाने के लिए सिने अभिनेता, बड़े-बड़े उद्योगपति आदि इन्हें काफी अधिक कीमत देकर खरीदते भी हैं। मध्य पूर्व के लगभग हर देश के लोग भी इन दुर्लभ पौधों के खरीदारों में शामिल है। यहां दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

इस नर्सरी का अवलोकन करने के लिए देश और विदेशों से भी प्रतिनिधिमंडल यहां आते हैं और ऐसे प्रयास की सराहना करते हैं। यह स्थान वनस्पति विज्ञान के छात्रों के लिए शोध का केंद्र भी बन सकता है।

शाहजहांपुर गांव के रहने वाले बहुत से लोगों ने भी यहां की इस नर्सरी से प्रेरित होकर बड़ी संख्या में पौधशालाएं (नर्सरी) खोल रखी है। यहां पर आम व अन्य फलों व फूलों से लेकर हर किस्म की पौध तैयार की जाती है, जिससे करोड़ों रुपए सालाना का व्यापार होता है।

काफी संख्या में पौधशालाएं (नर्सरी) होने के कारण इस गांव में कुम्हारों के द्वारा बड़ी संख्या में मिट्टी के गमले तैयार किए जाते हैं, जिससे उनका काम धंधा ठीक प्रकार से चलता है।

भारी मात्रा में फल एवं शाक सब्जी होने के कारण गांव में ही फल एवं शाक सब्जी की खरीद-फरोख्त के लिए एक मंडी लगती है। इस मंडी में गांव व आसपास के बहुत से लोगों को रोजगार मिलता है।

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