_____________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद(उ.प्र)के१०० किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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नवरात्रों के अवसर पर मां भगवती के नौ रूपों में नवरात्रों का सातवां स्वरूप कालरात्रि माना गया है।

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*** बिजनौर जनपद

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** नजीबाबाद –

मालन नदी के तट के समीप स्थित प्राचीन महाकाली मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु मां काली को प्रसाद, कपूर, पुष्प, बिंदी, फल, दाल, चूड़ियां, चुनरी, नारियल, सिंदूर सहित श्रंगार का सामान चढ़ाकर माता के सामने दीपक जलाते हैं और जीवन में सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

शारदीय नवरात्रों के सप्तमी के दिन सांयकाल महाकाली की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।

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*** गौतमबुद्धनगर जनपद –

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** जेवर  कस्बा  –

जेवर के देवी मंदिर मेले पर अश्विन नवरात्रों में भव्य काली अखाड़ा यात्रा निकाली जाती है।

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*** बुलंदशहर जनपद

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** बुलंदशहर –

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चंडी काली मंदिर –

बुलंदशहर में प्रथम भवानी मेला श्री महाकाली जी की यात्रा बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है काली अखाड़ा निकाला जाता है प्रथम भवानी मेला दोज भवानी मेला तृतीय भवानी मेला चौथ भवानी काली इस तरह से नवमी काली भवानी काली दशहरा बुलंदशहर में मनाया जाता है। बुलंदशहर की पुरानी गलियों में काली के स्वरूप की यात्रा निकाली जाती है l

बुलंदशहर में महाकाली  की आरती हर वर्ष नवम नवरात्रि पर काली महारानी की विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है।

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*   शिकारपुर में मां काली की शोभायात्रा

*  अहमदगढ़ में शिव शक्ति काली अखाड़ा शोभायात्रा

*  मलकपुर गांव  तहसील अनूपशहर

मां काली की शोभायात्रा

*  अनूपशहर   काली मेला

* खरखौदा  काली की झांकी

*  न्यूमी  काली मेला

 

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*** मुजफ्फरनगर जनपद
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** बिहारगढ़ गांव (मोरना क्षेत्र) –

मुजफ्फरनगर जनपद में मोरना क्षेत्र के गांव बिहारगढ़ के गंगा खादर के क्षेत्र में प्राचीन महाकाली का सिद्धपीठ मंदिर स्थित है।

देवी मां के चमत्कारों को देखते हुए इस मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई धीरे-धीरे यह मंदिर श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र बन गया।

मंदिर के प्रांगण में एक तपस्वी बाबा की समाधि बनी हुई है।बताते हैं कि बाबा ने वर्षों तक गंगा खादर के क्षेत्र में महाकाली की कठोर तपस्या की थी। जिससे यह स्थान सिद्ध पीठबन गया।

श्रद्धालु इस स्थान पर सुख शांति के लिए अनुष्ठान करने आते हैंमाता के दरबार में अनुष्ठान करने वाले भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।मंदिर में स्थित धोने की रात को श्रद्धालु अपने घर ले जाते हैं।

नवरात्रों के अवसर पर माता के गुणगान के अलावा यहां विशाल जागरण का आयोजन होता है इस समय दूरदराज के श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए आते हैं।

इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व मंदिर गंगा खोले के गांव मीरपुर में बना था। एक समय बरसात के मौसम में गंगा में अधिक जल आ जाने से इस गांव ग्रामीण गांव को छोड़कर गंगा किनारे आकर बिहारगढ़ गांव में बस गए।गांव के लोग अपने साथ मंदिर में स्थित मां काली की मूर्ति भी ले आए थे। गांव के बाहर मंदिर बना कर काली देवी की मूर्ति उस में स्थापित कर दी गई थी।

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