____________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १००किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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प्राचीन काल में बुलंदशहर का नाम बरन था। पहले यह स्थान ‘बनछटी’ के नाम से भी जाना जाता था। कालांतर में नागों के राज्य काल में इसका नाम अहिरावण भी रहा।

इसकी स्थापना अहिबरन नाम के राजा ने की थी। राजा अहिबरन ने यहां एक किले का निर्माण कराया था। जिसे  ऊपरकोट कहा जाता था l किले  के सुरक्षित परकोटे में उसने अपनी आराध्य कुलदेवी मां काली के भव्य मंदिर की भी स्थापना की थी। किले की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर खाई का निर्माण भी कराया। जिसे ऊपरकोट के पास से ही बहती काली नदी के पानी से भर दिया जाता था।

ऐसा भी माना जाता है बहुत पहले एक ऊंचे टीले पर बसे होने के कारण इसे ऊँचनगर भी कहा जाने लगा, मुसलमानों के शासन में ऊंचे का पर्याय बुलंद होने से इसका नाम बुलंदशहर  प्रचलित कर दिया गया।

मुगल काल में औरंगजेब के समय यहां जन विध्वंस भी हुआ और काली देवी के मंदिर को रूपांतरित कर दिया गया।

मुगल काल के बाद के समय में इस क्षेत्र में मालागढ़ छतारी व दानापुर रियासतें स्थापित हो चुकी थी जिनके अवशेष आज भी इस जनपद में देखे जा सकते हैं।

बुलंदशहर जनपद में कई स्थानों पर पुरातत्व खुदाई में प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। उनमें यमन राजा ‘अलक्षेंद्र'( सिकंदर) के सिक्के भी मिले थे। इस क्षेत्र में 400 से  800 ईसवी तक बौद्ध बस्तियां भी थी।

इसे क्षेत्र में 1018 ईसवी में विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने भी आक्रमण किया था उस समय यहां के राजा ‘हरदत्त’ थे।

गौरवशाली  और ऐतिहासिक  अतीत वाला बुलंदशहर एक प्राचीन और समृद्ध और विविध संस्कृतियों की विरासत वाला शहर है। यह औद्योगिकरण और शहरीकरण के लिए भी जाना जाता है।

यहां काला आम चौराहा, जिसका आम रूपी शिल्प एक आम्र वृक्ष का प्रतीक है। यह स्मारक स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों की स्मृति में बनाया गया है। जिन्हें यहां पर उस समय स्थित आम के पेड़ पर लटका कर फांसी दे दी जाती थी।

 

 

 

 

 

 

 

 

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