_______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार में पतित पावनी गंगा जी के तट पर स्थित प्राचीन ऋषियों की तपस्थली सप्त सरोवर। हरिद्वार-देहरादून मार्ग पर स्थित यह क्षेत्र हरिद्वार में भव्य मंदिरों का केंद्र बिंदु सा बन गया है। यहां स्थित भव्य मंदिरों में एक दर्शनीय स्थल है ‘भूमा निकेतन’।

इस मंदिर के संस्थापक दंडी स्वामी श्री भूमानंद तीर्थ जी महाराज हैं। उड़ीसा के कलाकारों ने अपने समूचे कला कौशल को इस मंदिर की कृतियों में उतार दिया है। मंदिर के प्रवेश द्वार के खुले चौक में श्री नारायण भगवान शेषनाग की शैया पर बैठे हुए हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर चक्र बनाए गए हैं तथा इस पर भारत के विभिन्न प्रदेशों के पारंपरिक नृत्यों को दर्शाते हुए नृत्यांगनाओं की सुंदर व मनोहारी मूर्तियां स्थापित की गई है जो उन प्रदेशों की संस्कृति के भी दर्शन कराती हैं।

प्रवेश द्वार से मंदिर में भीतर की ओर जाते हुए गंगावतरण का विस्तृत व मनोहारी चित्रण किया गया है। अति आकर्षक पहाड़ी पर भागीरथ द्वारा गंगा जी को पृथ्वी पर लाए जाने का विस्तृत व सजीव चित्रण किया गया है। शिव शंकर की जटा से गंगा जी प्रवाहित हो रही है। अति रमणीय यह दृश्य दर्शनीय है। इसके पश्चात अनेक विशाल रहस्यमय एवं विचित्र आकृतियों की गुफाएं बनाई गई है तथा उनमें रहते हुए अनेकों वन्य जीव जैसे बंदर ,शेर, हिरण, खरगोश, चीते इत्यादि जानवरों की सजीव मूर्तियां बनाई गई हैं।

गुफाओं से होते हुए कुछ सीढियों द्वारा ऊपर के भाग में जाते हैं। जहां पर अतिभव्य राजराजेश्वरी की अतिदिव्य सुंदर चिताकर्षक स्वर्ण प्रतिमा विराजित है। भगवती राजराजेश्वरी का स्वरूप पंच प्रेम आसाना है। ये तंत्र और मंत्र की सिद्ध देवी हैं। यह श्रीविद्या की भी ईष्ट देवी हैं।

मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर अखंड ज्योति प्रज्वलित है। इसके पास में ही दसमहाविद्या की प्रतिमाएं अवस्थित है। यहां पर शिवलिंग, द्वादश ज्योतिर्लिंग स्फटिक द्वारा निर्मित अवस्थित है। इनके आसपास अन्नपूर्णा माता एवं भगवान शंकर श्री दिव्य प्रतिमा पर विराजमान है। झूले में झूलते हुए भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप को दर्शाया गया है।

देवी-देवताओं की सुंदर एवं आकर्षक प्रतिमाओं के साथ इस मंदिर के आंतरिक भाग में विद्युत यंत्रों के द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार की झांकियों को दर्शाया गया है। इन झांकियों में प्रवेश द्वार पर ‌ दो शहनाई वादक बैठे हुए हैं। अंदर झांकियों में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र तारामती की झांकी जिसमें राजा हरिश्चंद्र को अपनी धर्मपत्नी तारा से अपने ही पुत्र के दाह संस्कार के लिए शुल्क मांगते हुए दिखाया गया है।

हिरण्कश्यप व प्रहलाद की झांकी तथा गज और ग्राह के युद्ध करते हुए की झांकी को अनूठी कलात्मकता के साथ दर्शाया गया है।

इसके अलावा अन्य झांकियों में शबरी प्रसंग जिसमें शबरी वृक्ष से बेर को तोड़कर खाकर देखती है। जिस डाली के बेर मीठे होते हैं उसी डाली के बेर राम को खिलाती हैं। एक अन्य झांकी में केकई को दशरथ से वर मांगते हुए व श्रवण कुमार के माता-पिता अपने तीर लगे पुत्र को गोदी में लेकर विलाप करते हुए दिखाए गए हैं। किसी झांकी में गणेश जी वेदव्यास जी द्वारा रचित महाभारत को लिख रहे हैं तो किसी अन्य झांकी में हनुमान जी के हृदय में सीताराम का चित्र अंकित है। इसके अलावा कई झांकियों में भगवान कृष्ण की लीलाओं को दर्शाया गया है।

विद्युत यंत्रों से संचालित यहां प्रदर्शित सभी झांकियों के स्वरूप को देख कर पर्यटक आहलादित हो उठते हैं।

इस मंदिर में श्री विद्या की उपासना विशेष रूप से होती है। मंदिर में वर्षभर विभिन्न पर्व उत्सवों, श्रावण मास में अखंड शिव पूजन, नवरात्रि, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी, गोवर्धन पूजा आदि के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव को विशेष रूप से मनाया जाता है।

कलात्मक शिल्प और कला कौशल की अनूठी मिसाल इस मंदिर को देखने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालु एवं पर्यटकों का विशाल जनसमुदाय भूमा निकेतन के इस आदित्य स्वरूप को देखने के लिए आता है। भूमा निकेतन आश्रम के सामने पावन गंगा नदी के तट पर भूमानंद घाट पर विशाल शिवलिंग बरबस श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। गंगा जी के तट पर घाट का सुंदर दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है।

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