_____________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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प्रकृति ने अपना मादक सौंदर्य चारों ओर फैला रखा है। पर्वत शिखरों की प्राकृतिक छटा तो देखते ही बनती है। भारत में पर्वतीय सैरगाहों में मसूरी का विशेष स्थान है। पर्यटक जिन पर्वतीय सैरगाहों की ओर उमड़ पड़ते हैं, उनमें मसूरी का दर्जा रानी का रहा है। पहाड़ों की रानी मसूरी का नैसर्गिक सौंदर्य किसी को भी अपनी को आकर्षित कर सकता है। मसूरी।……. सचमुच पहाड़ों की रानी है।

यूं तो हिमालय पर्वतीय क्षेत्र में कई पहाड़ी सैरगाह विराजमान हैं, लेकिन उन सब में पर्वतों की रानी मसूरी का नाम सबसे विशिष्ट है। मसूरी वास्तव में एक खूबसूरत नगरी ही नहीं वरन अपने भीतर शीतल हवा-शांत और अनामिक सौंदर्य छिपाए हुए है। मसूरी देहरादून से मात्र 36 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र तल लगभग दो हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।

अवकाश के क्षणों में अपनी हर व्यस्तता, परेशानी और थकान को दूर रख व्यक्ति किसी सुरम्य स्थान पर जाने की इच्छा करता है जहां उसे स्वप्निल वातावरण मिल सके। पर्यटकों के लिए मसूरी एक शीतल, सुरम्य, सुहावना और आकर्षक नाम है।

कहा जाता है कि मसूरी की स्थापना सन 1829 में कैप्टन यंग ने की। वह अपने साथियों सहित यहां शिकार के लिए आए थे, तब उन्होंने यहां एक होलीडे हट बनाई थी। धीरे-धीरे यहां मिलिट्री स्टेशन बन गया और इसके उपरांत इसकी नयनाभिराम सुंदरता को देखते हुए इसे एक पर्यटक केंद्र के रूप में विकसित किया जाने लगा।

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