_______________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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बेहट  –   सहारनपुर जनपद में उत्तराखंड हरियाणा की सीमा पर  शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी व नदियों का क्षेत्र है।

बेहट जिला मुख्यालय सहारनपुर से 27 किलोमीटर दूर चकरोता मार्ग पर स्थित है।

बेहट कस्बा घाड़ क्षेत्र में सिद्ध पीठ माता शाकुंभरी देवी, ताजेवाला हैडवर्क, बादशाही बाग, चिकलाना, हरिपुर और जैनपुर मार्गो से जुड़ा होने के कारण यह आसपास के गांवों का मुख्य क्रय केंद्र भी है।

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पौराणिक क्षेत्र माता शाकुंभरी देवी इसी क्षेत्र में है।

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बेहट आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां की जलवायु और मिट्टी आम उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसलिए ही यहां आमों के बड़े बड़े बाग हैं। सैकड़ों प्रजाति के आम यहां पर पैदा होते हैं।

विभिन्न 45 प्रजातियों का आम यहां से पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया समेत अनेक देशों में भेजा जाता है।

राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश बागवानी मिशन के अंतर्गत यह पूरा क्षेत्र फल पट्टी क्षेत्र घोषित है।

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हिंडन नदी का उद्गम स्थल  मुजफ्फराबाद विकासखंड का गांव पुरका टांडा इसी क्षेत्र में है।

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हथिनी कुंड बैराज  इसी क्षेत्र में हरियाणा सीमा में स्थित है

हथिनी कुंड बैराज से हरियाणा दिल्ली और राजस्थान को नहर के द्वारा पानी दिया जाता है l

इसी बैराज से निकलकर  पूर्वी यमुना नहर बेहट तहसील के गांव फैजाबाद से होकर शामली बागपत आदि जिलों से होती हुई दिल्ली के समीप यमुना में समा जाती है।

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यमुना नदी बेहट तहसील की फैजाबाद गांव में आती है और यहां से यह बूढ़ी यमुना के रुप में परिवर्तित होती है।

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खारा डाकबंगला  – –      सिंचाई विभाग का खारा डाक बंगला, खारा जल विद्युत परियोजना के निकट यमुना के किनारे ऐसे स्थान पर स्थित है जहां से हथिनी कुंड बैराज के अलावा हरियाणा,उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य अपनी अनुपम छटा के साथ दिखाई देता है। इसी सौंदर्य के कारण अंग्रेजों के शासनकाल में पूर्व अंग्रेज अफसरों ने यहां यह डाक बंगला बनवाया था। ब्रिटिश काल में अंग्रेज और आजादी के बाद जिले के अलावा मंडल एवं प्रदेश के अफसर, राजनेता, मंत्री आदि समय-समय पर यहां आकर ठहरते रहे हैं। इतना ही नहीं कई बड़ी और महत्वपूर्ण बैठकों का भी साक्षी यह डाक बंगला रहा है।

एक लंबे समय तक का इतिहास समेटे खारा डाक बंगला आज खंडहर बन कर रह गया है।

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बेहट का घंटियां और आयरन हैंडीक्राफ्ट उद्योग

बेहट कस्बा व उसके आस-पास के कई गांवों में लोहे की घंटियां व सुंदर सजावटी समान बनाने का कार्य अब एक कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। इस क्षेत्र में आयरन क्राफ्ट की कहीं बड़ी और सैकड़ों छोटी इकाइयां है।

बेहट के आसपास के गांव मीरपुर, नौगांवा, फतेहपुर कला, जाटोवाला, अब्दुल्लापुर, दयालपुर, उसंड, कलसिया, भूलनी, शाहपुर, पथरवा आदि गांवों में लोहे की घंटियां और मोमबत्ती स्टैंड बनाने का कार्य घर घर में होते हुए देखा जा सकता है। इस क्षेत्र में भूलनी गांव की घंटी बनाने में विशेष पहचान रही है। इस गांव के बारे में बताया जाता है कि इस गांव के कारीगरों के हाथों के हुनर का मुकाबला किसी अन्य क्षेत्र के कारीगर नहीं कर सकते। लोहे की घंटियां बनाने का काम भूलनी व नौगांवा गांवों में कुछ दशक पहले शुरू हुआ था। बाद में इस हस्तकला ने धीरे धीरे कस्बे में मजबूत पकड़ बनाई और फिर घंटी बनाने की हस्तकला आयरन हैंडीक्राफ्ट में बदल गई। बड़े पैमाने पर बेहट कस्बे और आसपास के गांवों । में खड़े हुए आयरन हैंडीक्राफ्ट से हजारों लोगों को रोजगार मिला और बेहट कस्बे की पहचान विश्व स्तर पर हुई।

शुरुआती दौर में मेलों के द्वारा इस हैंडीक्राफ्ट ने देश के बड़े बड़े नगरों तक अपनी पैठ बनाई। बाद में यहां के आईरन हैंडीक्राफ्ट से प्रभावित होकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई आदि बड़े नगरों के निर्यातक यहां पर घंटियों और आयरन हैंडीक्राफ्ट के सजावटी सामान ऑर्डर देकर बनवाते रहे और निर्यात करते रहे। बाद में मुरादाबाद के निर्यातकों ने भी यहां की बनी घंटियों और आयरन हैंडीक्राफ्ट का मुरादाबाद के बने हैंडीक्राफ्ट के नाम से अपनी फर्मों के द्वारा विदेशों में निर्यात किया। इस कारण और सरकार द्वारा कोई प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण बेहट का आयरन हैंडीक्राफ्ट निर्यात के मानचित्र पर अपनी अलग से कोई पहचान नहीं बना सका।

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तिल्लू की बनी सजावटी वस्तुएं

सहारनपुर जनपद के बेहट क्षेत्र में देश भर में प्रसिद्ध तिल्लू से सजावटी वस्तुएं बनाई जाती हैं। तिल्लूओं की कलाकृतियां बनाने के लिए प्रकृति ने यहां के इस क्षेत्र में सरकंडे के रूप में कच्चे माल का बहुत बड़ा भंडार प्रदान कर रखा है। कुशल कारीगर अपने हाथों से इसी सरकंडे को छोटे-छोटे तिल्लूओं में बदलकर उससे आकर्षक दीवार की पेंटिंग, मैगजीन के कवर, चटाइयां, ज्वेलरी बॉक्स, बैंगल बॉक्स चाय की ट्रे, आकर्षक सजावटी कलाकृतियां, पार्टीशन के पर्दे, फ्रूट टोकरी, डस्टबिन, मैगजीन कवर और दैनिक उपयोग में प्रयोग होने वाले तरह-तरह के सुंदर और टिकाऊ सामान तैयार करते हैं।

अन्य जगहों पर तिल्लू की वस्तुएं साधारण रूप में बनाई जाती हैं। इससे उनके जल्दी टूटने का या खराब होने का खतरा रहता है। परंतु केवल बेहट में ही उनके फ्रेम में बारीक किस्म के सरिए का प्रयोग करके वस्तुओं में टिकाऊपन और मजबूती प्रदान की जाती है।

तिल्लू से बने इन सुंदर सामानों की देश में तो काफी मांग है ही विदेश से आने वाले पर्यटक भी इनको पसंद करते हैं। बहुत अच्छी बनी हुई तिल्लू की कलाकृतियों का विदेशों में निर्यात भी किया जाता है।
बेहट क्षेत्र के अलावा सहारनपुर जिले में ही चिकलाना और मुजफ्फराबाद में भी तिल्ललुओं के सजावटी सामान बनाए जाते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

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