_____________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र. भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत
_____________________________________

मुजफ्फरनगर जनपद में एक तहसील मुख्यालय बुढ़ाना कस्बे का बेगम समरू से संबंध है। जब से मशहूर फिल्मकार अनुराग कश्यप ने समरू बेगम पर फिल्म बनाने का अपना इरादा जाहिर किया है। उसके बाद से यहां के लोग बुढ़ाना से उसके संबंध, यहां कस्बे में मौजूद समरू बेगम के जीवन से जुड़ी इमारतों और समरू बेगम के बारे में और अधिक जानने में दिलचस्पी लेने लगे है।

बुढ़ाना कस्बे में बेगम समरू का ऐतिहासिक किला है जो अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। उस समय बुढाना समरू बेगम की रियासत सरधना का ही हिस्सा हुआ करता था। यह ऐतिहासिक इमारत बेगम समरू ने अपने आवास के लिए बनवाई थी। इस इमारत में सौ फुट के लगभग ऊंचा एक हवामहल है। बेगम समरू जब भी बुढ़ाना आती थी तो इसी इमारत में ठहरती थी।

सन 1800 के समय इतिहास प्रसिद्ध बेगम समरू उर्फ फरजाना अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध थी।फरजाना का जन्म मेरठ जनपद के गांव कोताना में सन 1751 में लतीफ खां के घर हुआ था। जब उसकी आयु 16 वर्ष की ही थी उस समय ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। फरजाना को छोटी आयु में ही उसके सौतेले भाइयों ने शकूर नाम के एक व्यक्ति को बेच दिया था।

उसमें लोग फरजाना की खूबसूरती को देखकर कहते थे कि यह लोगों के दिलों पर राज करेगी। कशिश भरी सुंदरता वाली फरजाना का दिल शकूर के बेटे बशीर पर आ गया। लेकिन बशीर ने फरजाना को धोखा दिया और उसने फरजाना को दस हजार अशर्फियों में सरधना के मिस्टर सिमरु को बेच दिया।

मिस्टर सिमरु जर्मनी से आकर अंग्रेजों की सेना में भर्ती हुआ था। लेकिन महत्वाकांक्षी सिमरु तेजी से तरक्की करता हुआ सरधना की जागीर का नवाब बन गया।

मिस्टर सिमरु के घर जा बैठने के बाद से ही फरजाना को अपने साथ हुए धोखे व दुर्व्यवहार से मर्दो के प्रति घृणा और दुर्भावना उसके मन में घर कर गई।

मर्दों के प्रति प्रतिशोध की अग्नि उसके मन में धधकने लगी। उसने अपने रूप सौंदर्य को हथियार बनाया और मिस्टर सिमरु के दिलो-दिमाग पर छा गई। सरधना रियासत के लालच में उसने मिस्टर सिमरु से शादी कर ली और ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। इसके बाद से फरजाना बेगम समरू के नाम से जानी जाने लगी।

बाद में फरजाना ने सिमरू के सेनापति थामस से सांठगांठ करके मिस्टर सिमरू को राजकाज के कार्य से अलग-थलग कर जागीर का काम खुद देखने लगी। सेनापति थॉमस भी फरजाना के रूप सौंदर्य का इतना दीवाना हो गया था कि उसने मिस्टर थामस को गोली मारकर उसे खुदकुशी करार दे दी।

कुछ महीनों बाद ही दिल्ली के बादशाह शाह आलम ने उसे रूहेलों से मुकाबला करने के लिए भेज दिया। इसी बीच फौज का ही एक अधिकारी सीसौल फरजाना के रूप जाल में फस गया और उसने सेनापति थामस को फौज से निकालकर उसकी पत्नी को बंदी बना लिया। थामस की वफादार सेना ने सीसौल और फरजाना के विरुद्ध विद्रोह करके दोनों को बंदी बनाने के बाद सीसौल के टुकड़े-टुकड़े करके फरजाना के ऊपर फेंक दिए। वे फरजाना उर्फ बेगम समरु की भी हत्या करने वाले थे की अपने अंतिम समय में थामस ने उनसे प्रार्थना करके फरजाना को मारने से मना कर दिया। इस घटना के बाद बेगम समरु के मन में मर्दों के प्रति घृणा समाप्त हो गई।

सन 1809 में बेगम समरू की मृत्यु हो गई तब तक उसने सरधना की रियासत पर शासन किया।

बेगम के आने-जाने के लिए उस समय सरधना से बुढ़ाना के किले तक एक सुरंग भी खोदी गई थी। इस सुरंग के द्वारा उस समय फौज का सामान भी गाड़ियों में भरकर यहां से वहां आता जाता था। खंडहर होते किले में उस सुरंग को अब बंद कर दिया गया है।

ऐतिहासिक महत्व के भवन पर प्रशासन ध्यान दे दो यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *