_______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में व उसके निकट गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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देहरादून जनपद के जौनसार बावर के नाम से प्रसिद्ध जनजातीय क्षेत्र में अंग्रेज शासकों के द्वारा विकसित किया गया एक हिल स्टेशन चकराता स्थित है। उस समय अंग्रेज उच्च पद के अधिकारी यहां गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए आते थे।

देहरादून से 98 कि.मी. दूर चकराता एक छावनी शहर तथा पर्वतीय सैरगाह है। एक खूबसूरत प्राकृतिक स्थान होने से चकराता पर्य‌टकों को यहां छुट्टियां बिताने के लिए आकर्षित करता है। इस पर्वतीय सैरगाह के नजदीक क‌ई आकर्षक पर्यटन स्थल हैं। इन पर्यटन स्थलों की यात्रा का भी आनंद उठाकर पर्यटक अपनी यात्रा को और भी अधिक यादगार बना सकते हैं।

चकराता हिल स्टेशन दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों के लिए प्राकृतिक स्वर्ग के समान है। साहसिक पर्यटन एवं रोमांचक खेलों में रुचि रखने वाले पर्यटक भी यहां आकर अपनी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। चकराता हिल स्टेशन पर पर्यटक प्रकृति से संबंधित ट्रैकिंग, स्कीइंग, रॉफ्टिंग, मांउट कलाइम्बिंग, बर्ड वाचिंग और वाइल्ड लाइफ जैसी गतिविधियों का आनंद उठा सकते हैं।

चकराता की पहाड़ियां ट्रैकिंग व रेपलिंग के शौकीनों के लिए अनुकूल मानी जाती है। चकराता आसपास बुनेर, मुंडाली, मोगरा टॉप, खंडबा, किमोला फॉल आदि स्थानों की चोटियों पर ट्रैकिंग और रेपलिंग कराई जाती है। बुधेर नामक स्थान के पास जो छोटी बड़ी चोटियों की श्रृंखला है, यहां गर्मी के सीजन में विभिन्न स्थानों से पर्यटक पहुंचते हैं। इन पर्यटकों को यहां के प्रशिक्षित युवक ट्रैकिंग और रैफलिंग आदि कराते हैं।

चकराता सेना का छावनी क्षेत्र चीन और नेपाल की सीमा के निकट होने से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से यहां विदेशी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक है, यहां घूमने के लिए उन्हें चकराता छावनी के कमांडेंट से विशेष अनुमति लेनी होती है।

*** बुधेर की गुफाएं —–

चकराता के निकट ही समुद्रतल से 9184 फीट ऊंचाई पर बुधेर है ये घास का बड़ा मैदान है। पहाड़ी ढलानो पर मखमली घास का मैदान बुधेर( मोइली दंडा ) कहलाता है। ये जगह सर्दी के मौसम में बर्फ से ढंक जाती है।उस समय यहां स्नो स्पोर्ट्स का भी आनंद उठाया जा सकता है।

यह मैदान देवदार के घने जंगलों से घिरा हुआ है जो एशिया के सबसे घने और सबसे बेहतरीन जंगलों में से एक माना जाता है।

चूना पत्थर की अधिकता से यहां क‌ई छोटी – बड़ी गुफाएं हैं। यहां देवदार के जंगल के बीच अंग्रेजों के समय का बना हुआ वन विभाग का विश्राम गृह भी है।

*** देव वन —–

देवदार के वृक्षों की अधिकता से इस स्थान को देव वन कहा जाता है। चकराता से 16 कि.मी. की दूरी पर स्थित यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां से हिमालय की विशाल पर्वत श्रंखलाएं देखी जा सकती हैं। हिमालय की ऊंची चोटियों का मनमोहक नजारा पर्यटकों को भाव विभोर कर देता है।

देव वन में वन विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां आई एफ एस अधिकारी ट्रेनिंग के लिए आते हैं।

*** कोटी – कानासर का सुंदर बुग्याल —–

चकराता से 31 किलोमीटर दूर मसुरी- चकराता-त्यूणी मार्ग पर कोटी-कानासर बुग्याल पड़ता है।यह स्थान ऊंची पहाड़ियों और घने बरसाती जंगलों से घिरा हुआ है। ऊंची पहाड़ी ढलानों पर दूर तक फैले मखमली घास के मैदानों को बुग्याल कहा जाता है। समुद्र तल से 8500 फीट की ऊंचाई पर देवदार के घने जंगलों से घिरे बुग्याल को देखना एक अचरज भरा अनुभव होता है। यहां 600 वर्ष से भी पुराने देवदार के वृक्ष मौजूद हैं। यहां पर लगभग 6.5 फीट की गोलाई वाले देवदार के वृक्षों को देखकर लगता है कि यहां की वन संपदा कितनी समृद्ध है।

*** चिरमिरी —–

चिरमिरी के इलाके में संध्या के समय सूर्यास्त के सबसे सुंदर दृश्य का अनुभव किया जा सकता है।यह स्थान चकराता बाजार से 4 कि.मी.की दूरी पर है। पर्यटक यहां आकर प्रकृति को नजदीक से निहारने का आनंद लेते हैं।

*** मुंडाली व खंडबा —–

पहाड़ी सैरगाह चकराता के प्रमुख आकर्षण में यहां के निकट ही समुद्र तट से दस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मुंडाली और खंडबा एक खूबसूरत स्थान हैं। गर्मियों में पर्यटक यहां के खूबसूरत दृश्यों का आनंद उठा सकते हैं। मुंडाली चकराता से 36 कि.मी.की दूरी पर स्थित है। यहां की पहाड़ियां पर्यटकों के बीच ट्रैकिंग के लिए सबसे पसंदीदा स्थान हैं।

सर्दियों में यहां की पहाड़ी ढलानें बर्फ की चादर से ढक जाती हैं। स्कीइंग के लिए यह स्थान बहुत लोकप्रिय है। औली के बाद स्कीयर और स्नोबोर्ड के लिए यह स्थान भारत का सबसे लोकप्रिय स्थान है।

पर्यटकों में यहां आस-पास बने लोक देवताओं के मंदिर आकर्षण का केंद्र है।

*** विशाल चीड़ वृक्ष का संरक्षण स्थान —–

त्यूणी – पुरोला राजमार्ग पर हनोल से 5 किलोमीटर दूर खूनीगाड नामक स्थान पर एशिया महाद्वीप के सबसे ऊंचे और विशाल चीड़ के वृक्ष हो संरक्षित करके रखा गया है। चीड़ के इस महावृक्ष के धराशाई होने के बाद टोंस वन प्रभाग की ओर से इस विशाल वृक्ष की सभी डाटें इस स्थान पर सुरक्षित रखी गई हैं। संरक्षित किए गए इस महावृक्ष को देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटक यहां आते हैं।

चकराता के आसपास कई खूबसूरत जलप्रपात भी हैं —-

*** टाइगर फॉल्स —-

चकराता के पास पहाड़ी इलाके के बीच स्थित यह एक शानदार वाटरफॉल है। स्थानीय भाषा में इस झरने को केराओ पचड़ और कैलू पचड़़ भी कहा जाता है। लाखामंडल मार्ग पर स्थित इस झरने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस झरने की शेर की दहाड़ जैसी आवाज है। ऊंचाई से छोटे तालाब में गिरते हुए झरने का दृश्य बहुत खूबसूरत लगता है। मानसून के दौरान टाइगर फॉल्स को उसकी पूरी सुंदरता के साथ देखा जा सकता है। टाइगर जलप्रपात चकराता के सबसे पसंदीदा आकर्षक स्थलों में से एक है। और दिल्ली के पास सबसे अच्छे झरनों में से एक है।

*** मोईगड झरना —–

दिल्ली – यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर झरना स्थित है। इस मार्ग से यमुनोत्री आते जाते समय यहां स्नान करके तरो – ताजा हुआ जा सकता है।

*** किमोना जलप्रपात —–

चकराता के प्रमुख आकर्षणों में यह स्थान भी है जो पर्यटकों को रोमांचित करता है। किमोना वाटर फॉल्स पर जाना चकराता हिल स्टेशन की यात्रा के दौरान सबसे साहसिक गतिविधियों में से एक माना जाता है। इस वॉटरफॉल्स के पास भीड़ भाड़ कम होने के कारण यह घूमने के लिए एक आदर्श स्थान है।

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