__________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद में बघरा कस्बा मुजफ्फरनगर-शामली मार्ग पर स्थित है।

*** प्राचीन संकटमोचन मनोकामनापूर्ण मंदिर – बघरा

बघरा कस्बा स्थित योगसाधना यशबीर आश्रम के वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्रतिवर्ष मंदिर प्रांगण में संकटमोचन मनोकामनापूर्ण महायज्ञ का आयोजन किया जाता है।

इस आयोजन में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि कई राज्यों के श्रद्धालुओं के साथ साथ स्थानीय एवं मुजफ्फरनगर जनपद के हजारों की संख्या में स्त्री पुरुष श्रद्धालु भाग लेकर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए वेद मंत्रों के साथ भक्ति भावना के वातावरण में यज्ञ में आहूति देते हैं और भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यज्ञ में आहुति देने वाले के सब संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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***** गुरुकुल आर्यवर्त्त – बघरा कस्बा

बघरा ब्लाक के गांव बुढ़ीनाकलां में स्थित गुरुकुल आर्यवर्त्त की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। गुरुकुल में बाल्यावस्था से ही विद्यार्थियों को योग की घुट्टी पिलाई जाती है। यहां अध्ययनरत ब्रह्मचारियों ने देशभर में योग प्रदर्शन करके धूम मचाई है।

आर्यवर्त्त गुरुकुल की स्थापना सन 2002 में आचार्य श्रवण कुमार शर्मा ने की थी। बच्चों का वैदिक संस्कृति के अनुरूप निर्माण करना ही संस्था का उद्देश्य है। वैदिक संस्कृति पर आधारित इस गुरुकुल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है।

योग प्रदर्शन में वर्ष 2011 के वर्ल्ड योगा दिल्ली में इस गुरुकुल के मुकुल आर्य ने कांस्य पदक जीता था। वर्ष 2013 में वर्ल्ड योगा चैंपियनशिप गांधीनगर गुजरात में इसी गुरुकुल के अर्जुन ने तीसरा स्थान हासिल किया था। पलवल में हुई ऑल इंडिया योगा चैंपियनशिप में इस गुरुकुल के विनीत अटाली को रजत पदक प्राप्त हुआ था।

अन्य प्रतियोगिताओं में भी इस गुरुकुल के विद्यार्थियों ने पदक प्राप्त किए हैं।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित आईआईटी और यूपीटीयू आदि अन्य परीक्षाओं में इस गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की है।

गुरुकुल आर्यवर्त्त में मुस्लिम बच्चों ने भी पढ़ाई करके वेद मंत्रों और योग क्रियाओं में निपुणता प्राप्त की है।

*** पुराने समय से जर्राह चिकित्सा पद्धति के अनुसार चिकित्सा करने वाले ‘बघरा के जर्राह’ दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
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जैसोई गांव –

बघरा कस्बे से आगे मुजफ्फरनगर-शामली मार्ग पर ही जनपद मुख्यालय से 22किमी दूर गांव जैसोई स्थित है।

मुगल बादशाहों के शासनकाल में सत्ता का केंद्र रहे ऐतिहासिक जैसोई गांव में आज भी उस समय की सत्ता के अवशेष के रूप में किला मौजूद है।

मुगल काल में ही जैसोई की स्थापना मोहर सिंह सैनी के द्वारा की गई थी। उस समय इस क्षेत्र में मोहर सिंह सैनी एक महादानी पुरुष के रूप में विख्यात थे। उन्होंने ही जसमोहर के नाम से इसकी स्थापना की थी जो बाद के समय में बदलकर जैसोई हो गया।

* जसोई गांव के बड़े बाजार में प्राचीन शिव, दुर्गा-काली मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष चैत्र माह की चौदस के अवसर पर यहां भव्य देवी मेले का आयोजन बड़े उल्लास के साथ किया जाता है। इस अवसर पर साधु संत एवं धार्मिक आस्था वाले श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में यहां आते हैं।

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