_____________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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अमरोहा के वासुदेव तीर्थ स्थल पर स्थित ‘मीरा बाबा की मजार’ सांप्रदायिक एकता की मिसाल है।

इस स्थान पर मत्था टेकने वालों में हिंदू ही नहीं मुसलमानों की भी आस्था है।

मां अंबा के प्रिय भक्तों में मीरा बाबा की गिनती होती है। वासुदेव मंदिर परिसर में मां काली की विशालकाय प्रतिमा के साथ ही मीरा बाबा की मजार है l

मीरा बाबा के बारे में कोई कुछ ज्यादा तो नहीं बता पाता लेकिन उनका इतिहास साढे पांच हजार साल पुराना बताया जाता है।

मीरा बाबा को मानने वाले हिंदुओं के साथ मुसलमान भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं I भक्त श्रद्धा से धूप अगरबत्ती फल फ़ूल प्रसाद आदि भेंट करते हैं l मीरा बाबा की मजार पर चादर चढ़ाते हैं।

मीरा बाबा के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहां आकर पलक झपकते ही उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

मीरा बाबा के दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्र के ही नहीं उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। सावन और पूस आदि के दो ढाई महीनों को छोड़ दे तो पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। आषाढ़ और जेष्ठ माह के प्रत्येक बुधवार के दिन तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां शीश नवाने आते हैं। इन महीनों में हर एक बुधवार का दिन  विशेष महत्व का होता है। इन दिनों यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

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