_______________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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गंगा-यमुना के इस महाभारत क्षेत्र में गंगा नदी के बाएं तरफ ज्योतिबा फुले नगर जनपद का जिला मुख्यालय अमरोहा।

अमरोहा का  संबंध  महाभारत काल से है इसकी स्थापना आम्रहग्रोह नामक राजा ने की थी जो पांडवों के वंशज थे। माना जाता है कि इस शहर की स्थापना 3,000 ई.पूर्व हुई थी।

यह भी कहा जाता है अमरोहा को पहले किसी समय अजीज शाह के नाम पर बसे अजीजपुर के नाम से जाना जाता था ।  12 वीं शताब्दी के शुरुआती समय में यहां शाह शुर्फद्दीन उर्फ विलायत शाह का आगमन हुआ। उन्होंने इस स्थान के आम और रोहू( मछली) की विशेषता और इनकीअधिकता के कारण यहां का नाम आमरोहू रखा, जो आगे चलकर अमरोहा हो गया।

अमरोहा में कई महान हस्तियों का जन्म हुआ । उनमें रामसहाय और भगवान सहाय  दोनों भाई राज्यपाल रहे तथा रियासती काल में हैदराबाद निजाम के प्रधानमंत्री रहे विवारूलमुल्क जैसे राजनीतिज्ञ, कमाल अमरोही जैसे फिल्मकार, साहू जगदीश सरण जैसे महादानी  व्यक्ति यहां हुए जिन्होंने अमरोहा को एक नई दिशा दे कर पूरे देश में उसका नाम रोशन किया।

वासुदेव तीर्थ, गंगा दास मंदिर, यहां के तीर्थ स्थल है। वासुदेव तीर्थ स्थित मीरा बाबा की मजार की जात देने तो यहां दूसरे प्रदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।

फैजेरसूल और भूरे खां शहीद भी यहां के श्रद्धा स्थल हैं।

अमरोहा की हजरत शाह विलायत की दरगाह दूर-दूर तक बिच्छू वाली मजार के नाम से प्रसिद्ध है। 800 वर्ष पुरानी इस दरगाह की सीमा में चमत्कारिक रूप से बिच्छू के जहर का भी असर नहीं होता ‌। प्रतिवर्ष यहां एक विशाल मेला लगता है जिसमें देश विदेश के अकीदतमंद खासकर खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।

अमरोहा अपनी कई विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है।कृषि उत्पादों की मंडी होने के साथ-साथ अमरोहा हथकरघा एंव कई प्रकार के हस्तशिल्पों के लिए भी प्रसिद्ध है।  दस्तकार बाहुल्य स्थान होने से यहां तरह-तरह के दस्तकारी के काम किए जाते हैं।

अमरोहा ढोलक बनाने के लिए प्रसिद्ध है।राज्य सरकार ने एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत अमरोहा में ढोलक बनाने के हस्तशिल्प को चुना है। ढोलक के साथ साथ यहां संगीत उपकरण भी बनाए जाते हैं।

यहां लकड़ी से संबंधित अनेक प्रकार की सुंदर वस्तुएं बनाई जाती हैं। विभिन्न प्रकार के लकड़ी के खिलौने, पतियों और दूसरी अन्य चीजें बनाई जाती हैं।

हथकरघा उद्योग  जिसमें यहां सुंदरतम कालीन, रेशमी -सूती और मखमली गद्दे, पर्दे व दरियां यहां तैयार किए जाते हैं। रंगाई छपाई का कार्य भी बड़े पैमाने पर होता है।

जैसा कि अमरोहा का नाम यहां पर आम के बहुतायत में होने की विशेषता पर ही पड़ा था। वर्तमान में भी आम यहां बहुतायत में होता है। सैकड़ों प्रकार की प्रजाति के आम यहां उगाए जाते हैं। इसके अलावा कई प्रकार की सब्जियां भी यहां उगाई जाती हैं। जिन्हें बाहर की मंडियों में भेजा जाता है।

अमरोहा बीड़ी बनाने के उद्योग के रूप में भी जाना जाता है। यहां के बहुत से घरों में बीड़ी बनाना जीविका का एकमात्र साधन है l

यहां पर वैल्ट कॉटन, बफ निर्माण और बैक्यू लाइट का कार्य भी कुटीर उद्योग के तरह होता है।

यहां के राजगिरी मिस्त्री भी अपने हुनर के लिए जाने जाते हैं। देश की पार्लियामेंट के बनाने में अमरोहा के अनेक राजगीर मिस्त्रियों का योगदान है।

अमरोहा धार्मिक शिक्षा का भी केंद्र है। कई बड़े मदरसे यहां स्थित है।

यह नगर हकीमों का भी गढ़ है मुगल काल में यहां के हकीमों को राय सम्मान प्राप्त था।

 

 

 

 

 

 

 

 

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