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_____________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के लगभग १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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कुरुक्षेत्र की चौरासी कोस की परिक्रमा में अमीन गांव एक बहुत ही महत्वपूर्ण पौराणिक स्थल है।

अमीन गांव जिसका प्राचीन व पौराणिक नाम ‘चक्रापुरी नगरी’ था। अमीन गांव एक ७०-८० फुट अतिऊंचे टीले पर बसा हुआ है जो महाभारत के युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी रहा है। अमीन गांव में और इसके आसपास कई महत्वपूर्ण पौराणिक तीर्थस्थल हैं, श्रद्धालु अमीन गांव की परिक्रमा करके यहां स्थित तीर्थों के दर्शन करते हैं।

अमीन गांव थानेसर से लगभग 7-8 कि.मी.दूर बसा हुआ है और दिल्ली-अंबाला रेलवे लाइन पर स्टेशन भी है।

अमीन गांव के उत्तर और दक्षिण में दो जीर्ण शीर्ण और ध्वस्त किले हैं। किसी समय अमीन के यह सुदृढ़ किले इस क्षेत्र की समृद्धि और सुरक्षा के स्थान रहे होंगे। इस धरती ने शताब्दियों तक गोरी और नादिरशाह जैसे आक्रमणकारियों के आक्रमण सहे हैं। मध्यकाल में आक्रमणकारियों ने इन किलो को ध्वस्त कर दिया।

महाभारत की युद्धस्थली कुरुक्षेत्र का रणक्षेत्र ४८ कोस की परिधि का माना जाता है और कहा जाता है अमीन ही वह स्थान है जहां अर्जुन के वीरपुत्र और योद्धा अभिमन्यु के लिए गुरू द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की थी, जिसमें अर्जुन पुत्र ‘अभिमन्यु’ प्रवेश तो कर पाया था किंतु चक्रव्यूह के सातवें द्वार में फंस चुके अभिमन्यु का कौरव पक्ष के अनेक योद्धाओं ने घेरकर अन्यायपूर्वक वध कर दिया था। इस प्रकार अमीन गांव अभिमन्यु की वधस्थली है। कहा जाता है अभिमन्यु से ही अपभ्रंश होकर इसका नाम अमीन हो गया है।

अमीन गांव का पौराणिक महत्व केवल महाभारत कालीन कथा-प्रसंगों से के चलते ही नहीं हैं अपितु यहां आदिकाल व त्रेताकाल में भी अनेक पौराणिक घटनाएं घटी है।

कुरुक्षेत्र की ४८ कोस की धरती के अंतर्गत सात वन विख्यात हैं – आदिवन,कामवन,व्यासवन,फलकीवन, र्सतवन,शाल्मलिवन और बिहारवन।

स्थानीय निवासियों और विद्वानों का विश्वास है कि आदिवन (अदितिवन) अमीन को कहते हैं। अदितिवन को हीै द्वैतवन भी कहा गया है क्योंकि ऐसी धारणा है कि इस वन में प्रवेश करने से द्वेषभाव मिट जाता था। इसी वन में अदिति व कश्यप ऋषि का आश्रम था, जहां अदिति ने पुत्र प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या की थी, इसी से इस वन को अदिति वन कहा गया है। कहते हैं कि भीष्म पितामह ने अदितिवन को ही महाभारत का युद्ध क्षेत्र बनाने का सुझाव दिया था।

यह पावन धरती सूर्य उपासना का मुख्य केंद्र रही है। इस धरती से वैष्णव और नाग संप्रदाय के साथ-साथ गाणपत्य संप्रदाय का भी गहरा संबंध रहा है।

अदिति कुंड तथा सूर्य कुंड –

अमीन गांव के पूर्व में दो सरोवर हैं इनमें से एक प्राचीन वामन कुंड है और इसके साथ ही सूर्यकुंड है जिसका संबंध सूर्य से है। सूर्य कुंड अमीन गांव का सबसे प्राचीन तीर्थ है। यह वह प्राचीन स्थान है जहां कश्यप ऋषि और उनकी पत्नी अदिति ने कठिन तपस्या की थी तथा इसी स्थान पर अदिति ने सूर्य को अपने पुत्र मार्तंड सूर्य के रूप में जन्म दिया था। सूर्य के जन्म के स्थान के चलते ही यहां सूर्यकुंड नामक पवित्र सरोवर धाम बना है।

सूर्यग्रहण के अवसर पर इस सरोवर में स्नान करने का बहुत महत्व बताया गया है। सूर्य कुंड के जल का स्पर्श करने स्नान करने पितरों का तर्पण करने तथा यहां पूजन करने व उपवास रखने से अनेक पुण्यों की प्राप्ति होती है और व्यक्ति सूर्यलोक को जाता है।

इस सरोवर के मध्य में एक प्राचीन सरोवर(बावड़ी) है, जिसे अदिति कुंड कहा जाता है। इस कुंड में उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। यहां के लोगों का कहना है कि सफाई के दौरान सरोवर का जल निकालने के बाद भी बावड़ी से जल निकलता रहता है। यह जल कहां से आता है, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है।

इस सरोवर के किनारे ही हजारों वर्ष प्राचीन बनखंडी शिव मंदिर बना है। प्राचीन बनखंडी शिवलिंग की बहुत मान्यता है। सूर्यकुंड व बनखंडी महादेव मंदिर पर भाद्रपद शुक्ल पंचमी, षष्टि, सप्तमी को यहां के सूर्य कुंड में स्नान करने का बहुत पुण्यदायक बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि यहां सूर्य-स्तोत्र का पाठ करने से अप्राप्य वस्तु की भी प्राप्ति होती है।

‌ सूर्य कुंड में स्नान करने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। साफ जल वाले सरोवर में स्नान करने हेतु अनेक प्राचीन व कलात्मक घाट बने हुए हैं।

सूर्य कुंड के तट पर ही कई ऋषि मुनियों की समाधियां बनी हुई हैं। इनमें महर्षि कश्यप तथा माता अदिति की समाधियां भी हैं। यहां रंतुक यक्ष की भी समाधि है। बताया जाता है कि यह वही रंतुक यक्ष हैं जिन्होंने पांडवों से प्रश्न पूछे थे युधिष्ठिर के अन्य भाइयों के यक्ष के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर न देने पर वे सब अचेत हो गए थे। युधिष्ठिर के द्वारा यक्ष के सभी प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर देने पर उन्होंने अपने सभी भाइयों को जीवित करवा लिया था।

कहा जाता है कि भगवान परशुराम जी ने त्रेता काल में इस सूर्य कुंड में स्नान किया था।

महाभारत में भीष्म पितामह से प्रतिशोध लेने वाली अंबा का भी इस स्थान से संबंध है। कहा जाता है कि जब अंबा भीष्म से प्रतिशोध लेने के लिए यहां तपस्या करने लगी, तब भगवान शिव ने प्रकट होकर अंबा को शिखंडी का रहस्य बतलाया था तथा भीष्म से प्रतिशोध लेने का रहस्य बता कर अंतर्ध्यान हो गए थे। अमीन में ही अंबा ने शरीर त्यागा था।

वामन कुंड –

यह वामन भगवान का जन्म स्थान है। पौराणिक कथा के अनुसार दैत्यों के राजा बलि ने जब देवताओं का राज्य छीन लिया और उन्हें स्वर्ग से भगा दिया तब भगवान विष्णु ने अदिति के पुत्र के रूप में जन्म लिया। अदिति पुत्र वामन भगवान ने बलि के यज्ञ में पहुंचकर उसे उसके राज्य की तीन पग भूमि मांगी। बलि ने तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया और अदिति पुत्र भगवान वामन ने बलि के राज्य को तीन पग में माफ कर पुणः देवताओं को दे दिया।

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