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महाभारत काल में गढ़मुक्तेश्वर जल मार्ग से व्यापार का मुख्य केंद्र था, उस समय यह हस्तिनापुर राज्य की राजधानी का एक हिस्सा था। निकट ही पुष्पावती जो आज पूठ गांव के नाम से जाना जाता है, उस समय यह भी खांडवी वन क्षेत्र का हिस्सा था। उस समय पुष्पावती नाम का एक मनमोहक भव्य उद्यान था, जो हस्तिनापुर के नरेशों का क्रीड़ोद्यान था। यहां के कई नरेश होने यहां मंदिर व वाटिकाओं का निर्माण कराया। द्रोपदी अपने मन बहलाव के लिए फूलों की घाटी में प्रायः घूमने के लिए आया करती थी। आज भी यहां जंगल में कई प्रकार के दुर्लभ पुष्प पाए जाते हैं।

हस्तिनापुर से पुष्पावती के बीच ३५ किलोमीटर तक खांडवी वन क्षेत्र फैला हुआ था। आज यह स्थान पूठ के नाम से जाना जाता है। हस्तिनापुर से पुष्पावती तक जाने के लिए एक गुप्त मार्ग था, जिस के चिन्ह कुछ दशकों पहले मौजूद थे, जो अब समाप्त हो चुके हैं।

यहां श्री रघुनाथ जी श्री राधा कृष्ण तथा महाकालेश्वर के मंदिर गंगा तट पर है।

पूठ गांव में प्रसिद्ध गुरुकुल आश्रम भी स्थित है।

सोमवती अमावस्या को यहां मेला लगता है।

पूठ गांव से लगभग 10 – 12 किलोमीटर दूर माडू गांव है कहा जाता है कि यहां माण्डव्य ऋषि का आश्रम था। यहां माण्डव्य ऋषि की तथा मण्डकेश्वर महादेव का मंदिर है।

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